वास्तु शास्त्र के कुछ सार्वभौमिक सिद्धांत

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सभी प्राणियों पर एक समान रूप से लागू :

 हम सभी यह भली-भांति जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में नैसर्गिक ऊर्जा तरंगों की प्रकृति को मध्य नजर रखते हुए ही भवन निर्माण एवं निर्मित भवन में दिवस से संबंधित दिशा निर्देश दिए जाते हैं इस प्रकृति के सभी अवयवों एक दूसरे से गवन अंतर संबंध स्थापित किए रहते हैं वह यह सभी एक दूसरे पर निर्भर भी रहते हैं यदि गहराई से देखें तो प्रकृति के समस्त सिद्धांत निरंतर सार्वभौमिक है। अर्थात मानव जाति के कल्याण की बात करने वाला वास्तु शास्त्र जो भी दिशा निर्देश देता है वह सभी प्राणियों पर एक समान रूप से लागू होते हैं और इस कारण यह सिद्धांत हर धर्म देश प्रदेश लिंग जाति एवं धरती के हर एक भूभाग पर रहने वाले सभी व्यक्तियों एवं प्राणियों पर समान रूप से लागू होते हैं।

 

भूमि का भ्रमण

संपूर्ण भूमि अपने काल्पनिक क्षेत्रीय अक्ष पर 23 पॉइंट 5 डिग्री झुकी हुई है और यह सूरज के आसपास एक पूर्व निर्धारित एवं प्राकृतिक ऑर्बिट (वलयाकार मार्ग) पर निरंतर निश्चित गति से भ्रमण करती है,और संपूर्ण मानव जाति इस पृथ्वी पर रहती है इसलिए वर्ष भर में बदलते जलवायु एवं तापक्रम का प्रभाव सभी से एक जैसा नाता बनाए हुए हैं परिभ्रमण के परिणाम स्वरुप प्राकृतिक ऊर्जाओं को मानव कल्याण हेतु प्रयोग की ही तरफ इशारा करता है वैदिक वास्तु विज्ञान अतः यह शास्त्र केवल भारत वर्ष या भारत के किसी एक हिस्से पर लागू ना होकर समान रुप पूरी दुनिया पर लागू होता है।

अल्ट्रावायलेट किरणें

वैदिक वास्तु शास्त्रीय सिद्धांतों के परिपेक्ष्य में दूसरा मुख्य आधार है पृथ्वी का अपने काल्पनिक ऊध्र्वाधर  दूरी पर लगातार घूमते रहना इसके कारण ही दिन व रात बनते हैं, साथ ही दिन एवं रात के तापमान में परिवर्तन ही मौसम की बदलती चाल का द्योतक होता है। विशुद्ध वैज्ञानिक वास्तु शास्त्र के अंतर्गत पृथ्वी पर पड़ने वाली सूरज की किरणों के संदर्भ में भी विश्लेषण किया जाता है,वह पूर्वोत्तर में स्थित ईशान कोण से दक्षिण पश्चिम स्थित नेरित्य कोण तक सूरज की किरणों के बदलते मिजाज को भी तीव्रता के परिपेक्ष्य में आंका जाता है। निश्चित रूप से इसी कारण यू.वी 1 यूवी 2 यूवी 3 श्रेणी मैं सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें युवी रेंज मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के दृष्टिकोण से अपना विशेष महत्व रखती है इसीलिए युवी 1 एवं युवी 3 की तीव्रता के कारण प्रायः वास्तु शास्त्र में दक्षिण मुखी भवनों में दक्षिण दिशा में बड़े ऊंचे व घने पेड़ पौधे लगाने की सलाह दी जाती है ।

गुरुत्वाकर्षण बल

गुरुत्वाकर्षण बल संपूर्ण पृथ्वी के भार से एक घना संबंध रखता है। यह तथ्य भी सारी धरती पर हर एक इंसान के लिए समान रूप से व्यवहार करता है सोते समय किसी के शरीर के ऊपर छत में कोई भारी बीम या मोटा शहतीर होने पर नकारात्मक स्थिति पैदा होती है वह निद्रा एवं स्वास्थ्य के लिहाज से यह अच्छा परिणाम नहीं देती इसी प्रकार बेड के ऊपर के भाग में छत पर रखी बड़ी पानी की टंकी भी वही प्रभाव पैदा करती है वह इस सृष्टि में हर एक व्यक्ति पर एक समान प्रभाव डालती है।

चुंबकीय क्षेत्र

 चुंबकीय क्षेत्र जोकि हमारी धरती के परिपेक्ष्य में उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है, इसका भी सार्वजनिक रूप से हर एक व्यक्ति के शरीर से एक समान रिश्ता है एक सामान्य रूप से हर एक चीज का ऊपरी भाग उत्तर के ध्रुव या चुंबक के उत्तरी सिरे का प्रतिरूप होता है। इसलिए भूमि का ऊपर वाला भाग उत्तरी ध्रुव होता है अतः वास्तु शास्त्र में यह सलाह दी जाती है कि सोते समय हमारा सिर्फ जो कि शरीर का उत्तरी ध्रुव है, उसे कभी भी पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव की तरफ नहीं रखना चाहिए। क्योंकि दो चुंबको के समान ध्रुव एक दूसरे से विकरण का व्यवहार करते हैं व इस प्रकार नींद में बाधा एवं सिर में भारीपन का एहसास होता है, वास्तु का यह नियम भी सार्वभौमिक है ।

तरंग धैर्य का सिद्धांत

प्रातः कालीन सूर्य रश्मियों के नैसर्गिक सकारात्मक गुणों के कारण वास्तु शास्त्र में यह बताया जाता है कि हम जिस भवन में रहते हैं, या व्यवसाय करते हैं वहां की पूर्व दिशा की खिड़कियों व दरवाजों को सुबह खोलना चाहिए क्योंकि प्रातः कालीन सूर्य की किरणों की तरंग धैर्य 320 नैनोमीटर के लगभग होती है। जिसमें कीटाणु विषाणु को मारने की अद्भुत क्षमता होती है इसी कारण विश्व के लगभग समस्त धर्म एवं संस्कृतियों में पूजा अर्चना का समय सुबह बताया जाता है। विज्ञान के अनुसार सूर्य की किरणों से हमारे शरीर को विटामिन डी की प्राप्ति होती है वास्तु शास्त्र में प्रकृति संबंधित इस नियम को भी संपूर्ण विश्व में सभी प्राणियों पर एक रुप से लागू माना जाता है।

उपरोक्त संपूर्ण विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि अति प्राचीन वैदिक वास्तु शास्त्र सर्वजन हिताय की भावना एवं विश्व कुटुंबकम निर्मल विचारों का पोषक है। वह इसका किसी एक व्यक्ति विशेष धर्म जाति प्रजाति देश या प्रदेश से कोई लेना देना नहीं है।

 

 

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This Post Has 33 Comments

  1. Santoshi Tudu

    धन्यवाद सर पोस्ट के लिए।

  2. Srushti sudhir utekar

    khidki aur darvaja ka pata hee nahi tha ki morning me open hone hee chahiye thanks sir

  3. Srushti Utekar

    चुम्बकीय आकर्षक समजले खुप छान 🙏

    1. Udit shreemal

      Very important.

      1. Nirmala gahtori

        Knowledge base information guruji

  4. SANDEEP KUMAR SAHU

    Nice explanation

  5. Goldi Babbar

    Nice

    1. Geetanjali

      Nice sir ji 🙏

  6. Goldi Babbar

    Amazing

  7. dharmendra

    Amazing

  8. DIPAKBHAI SONAGARA

    Good

  9. DIPAKBHAI SONAGARA

    Nice

  10. Ashwini Yogesh Pingle

    Very nice

  11. Vivek kumar

    GREAT

  12. Arti Srivastava

    Very useful information

  13. Ramu Singh

    अच्छी जानकारी

  14. SANJAY SAMPATLAL DARDA

    Sir afternoon Sun ultraviolet xray in South Zone close windows or heat Curran hanging in south wall
    Very nice information

  15. Kailash vats

    Very nice

  16. Sneha

    This is amazing information about vaastu.🙏🙏

  17. Sitaram Keshri

    संपूर्ण भूमि अपने काल्पनिक क्षेत्रीय अक्ष पर 23 पॉइंट5डिग्री झुकी हुई है। ईशान कोण से नैऋत्य कोणतक सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें युवी रेंज मानव शरीर पर प्रभाव पड़ती है। यूवी 1 एवं यूवी 3 की तीव्रता के कारण दक्षिण दिशा में बड़े ऊंचे व घने पेड़ पौधे लगाने की सलाह दी जाती है। सोते समय किसी के शरीर के ऊपर छत में कोई भारी बीम होने पर निद्रा एवं स्वास्थ्य पर परिणाम अच्छा नहीं होता है। उत्तर दिशा की तरफ सिर करके नहीं सोना चाहिए। पूर्व दिशा की खिड़कियों व दरवाजों को सुबह खोलना चाहिए क्योंकि प्रातः कालीन सूर्य की किरणों की तरंग धैर्य 320 नैनोमीटर के लगभग होती है

  18. Udit shreemal

    Too good sir..

  19. GANESH BHOPE GURUJI

    Saraj bhasa me samja diya 👍👌👌

  20. Priya saklecha

    Nice explanation

  21. Chandrajit

    Very nice

  22. Pranali_B

    Vastu information iske phile bhi phot pdhe hai bt yha sb clear ho rha hai…

  23. Vastu ke niyam sabhi par ek saman lagu hota hai, jaise guruttwakarsan shakti ya chumbakiya shakti sabhi ke upar ek jaisa lagu hote hai

  24. VAIBHAV JAIN

    Nice information… Sir

  25. VAIBHAV JAIN

    Great information… Sir

  26. aditya

    Very nice info

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