45 देवताओं के नाम क्रमवार

1 ब्रह्मा2 आर्यमा3 विवस्ना4 मित्र5 पृथ्वीधर या भूधर6 आप7 आप वत्स8 सविता9 सावित्री10 इन्द्र11 इन्द्र जय12 रूद्र13 रूद्र जय14 शिखी15 पर्जन्य16 जयन्त17 महेन्द्र18 सूर्य19 सत्य20 भृश21 आकाश22 अग्नि23 पूषा24 वितथ25…

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24 तीर्थंकरों के नाम व पद चिन्ह

1 आदिनाथ जी / ऋषभदेव जी- बैल2 अजितनाथ जी -  हाथी3 सम्भवनाथ जी - घोडा4 अभिनन्दन जी -  बन्दर5 सुमतिनाथ जी -  चकवा6 पद्म प्रभु जी - कमल7 सुपाश्र्वनाथ जी…

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Sleeping Zones

North - New ClientsNNE - Lungs Problem, mucus (Not recovering soon), Marriage Life disturb, Worshiping, renunciationNE - MeditaionENE - HappinessEast - SocialESE - New Couples Arguments, Child Aggressive, ArrogantSE -…

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वास्तु निघण्टु 45 देवता व उनके गुणधर्म

ब्रह्मापरिचय:वास्तु के मध्य स्थान को ब्रह्म स्थान कहते है। किसी भी स्थान या क्षेत्र का मध्य स्थान नाभी होता है इसे सेन्टर या न्यूक्लीयस भी कहते है। सारी सृजन की…

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वास्तु शास्त्र में ज्ञानेंद्रिय आधार

ज्ञानेंद्रिय सिद्धांत हम सभी यह जानते हैं कि जिस प्रकार वास्तु शास्त्र के सिद्धांत पंचतत्व या पंचमहाभूतओ के इर्द गिर्द घूमते हैं। उसी प्रकार वास्तु में वर्णित पांचों तत्व हमारे…

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वास्तु शास्त्र का पर्यावरण सुरक्षा में योगदान

प्रकृति के साथ तालमेल प्रकृति के द्वारा बनाए गए सिद्धांतों एवं इनके साथ तालमेल रखते हुए जीवन बिताना ही वास्तु शास्त्र के मर्म में छिपा वह रहस्य है जिसे हमारे प्राचीन…

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वास्तु शास्त्र का स्वास्थ्य से संबंध

स्वास्थ्य के लिए विभिन्न वास्तु आयाम: वैदिक वास्तु शास्त्र में वर्णित सभी दिशा निर्देश पंचतत्व के सिद्धांत के आसपास घूमते हैं। सृष्टि मानव जीवन पर्यावरण एवं प्रकृति आदि सभी कुछ पांच…

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वास्तु शास्त्र के कुछ सार्वभौमिक सिद्धांत

सभी प्राणियों पर एक समान रूप से लागू : हम सभी यह भली-भांति जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में नैसर्गिक ऊर्जा तरंगों की प्रकृति को मध्य नजर रखते हुए ही भवन…

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भूमि की विभिन्न सकारात्मक एवं नकारात्मक ऊर्जा तरंगे

परंपरागत वास्तु शास्त्र का विषय क्षेत्र परंपरागत वास्तु शास्त्र में दो प्रकार का अध्ययन किया जाता रहा है एक तो वह जो कि विभिन्न दिशाओं व उप दिशाओं से संबंधित पद्धति…

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