वस यानि रहना। वास्तु का पूरा मतलब है इस तरह से रहना।

प्रकृति के नियमों को ध्यान में रखकर किया गया निर्माण ही वास्तु है।

वस्ति इति वास्तु। प्रत्येक वस्तु का उसकी आवश्यकता एवं प्रभाव अनुसार रखना ही वास्तु है।     

सदियों से हमारा दिमाग प्रतीक चिन्हों की भाषा समझता आया है। ये हमारे अन्तर्मन या कहे अवचेतन मन या हमारे डी एन ए में पहले से ही स्टोर है। जैसे एक माता-पिता के गुण संतान में विरासत के रूप में आते हैं। ठीक वैसे ही प्रतीक चिन्हों की पहचान हमें विरासत में मिलते हैं।

  जाने-अनजाने रूप में उन चिन्हों को समझते ही हैं और उन से संकेत प्राप्त करते हैं। गलत स्थान पर रखी गई वस्तु या ऐसा कहें की एक वस्तु जिसको रखने की दिशा कहीं और होनी चाहिए थी। वह हमें गलत संकेत भेजेगी और हमें नुकसान भी करवा सकती है। हमें ऐसा कुछ संकेत भेजेगी की हम कुछ गलत निर्णय लेंगे। हम जानते हैं कि जिंन्दगी सफलता या असफलता हर फैसले पर निर्भर करती है। एक गलत फैसला हमारी वर्षों की मेहनत को खत्म भी कर सकता है। वहीं एक सही निर्णय जीवन में सफलता का कारण बनता है।

भारतीय दर्शन के 5 उपांग है – योग, ज्योतिष, वास्तु, संगीत एवं आयुर्वेद।

योग – काया कल्प

ज्योतिष – भाग्य कल्प

वास्तु – भाग्य कल्प

संगीत – मन कल्प

आयुर्वेद – काया कल्प

भाग्य को बदलना है तो हमें ज्योतिष और वास्तु के नियमों को काम में लेना होगा।

वास्तु दोष निवारण द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति के विचार नहीं बदले जा सकते हैं लेकिन वास्तु दोष निवारण से सकारात्मक उर्जा का प्रभाव होता है और वहां रहने वाले सभी व्यक्तियों के विचार सकारात्मक होने लगते हैं

वास्तु सभी इंसानों पर एक ही प्रकार से प्रभाव डालता है लेकिन जिस दिशा का दोष होगा उस अनुसार व्यक्ति विशेष पर प्रभाव डालेगा जैसे आग्नेय कौन का दोष है तो वह घर की स्त्रियों पर  प्रभाव डालेगा नैऋत्य का दोष है तो वह घर के मुखिया पर प्रभाव डालेगा । जिस दिशा का दोष होगा उस दिशा के आधिपत्य व्यक्ति पर प्रभाव डालेगा।

वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर किया गया निर्माण अच्छी एनर्जी को हमारी ओर आकर्षित करता है हमारे विचारों को सुदृढ़ता देता है वास्तु दोष निवारण होते ही हमारा भाग्य पूरी तरह से एकदम नहीं बदल जाता लेकिन धीरे.धीरे हमारे विचारों पर प्रभाव पड़ता है हमारे जीवन में खुशियां आकर्षित होने लगती है हम ज्यादा खुशियों के साथ रहने लगते हैं

वास्तु दोष निवारण होने के बाद घर में सकारात्मकता बढ़ जाती है अच्छे समाचार मिलने लगते हैं उस घर में रहने वाले लोगों का सामंजस्य बढ़ने लगता है उनके विचार मिलने लगते हैं यदि यही वास्तु दोष निवारण किसी बिजनेस के लिए किया गया है तो वहां के ग्राहक हमसे ज्यादा संतुष्ट रहने लगते हैं कर्मचारियों का आपस में सामंजस्य व्यवहार मधुर होने लगता है बिजनेस संबंधित आने वाली परेशानियां खत्म होने लगती है। अच्छे वास्तु की पहचान है – वहाँ पर सुख-शान्ति-समृद्धि का वास होता है।

यदि हम हमारे चारों और सकारात्मकता बढ़ाना चाहते हैं अच्छे लोगों को आकर्षित करना चाहते हैं तो हमें वास्तु दोष निवारण करा लेना चाहिए जैसे हमारे शरीर पर अंग सही जगह है, तो हम स्वस्थ रहते हैं। ऐसे ही यदि वास्तु के अनुरूप भवन की रचना की गई है तो वहाँ रहने वाले स्वस्थ, सुखी व समृद्ध होंगे।

नया मकान वास्तु नियम अनुसार नहीं बनाया गया है तो उसमें वास्तु दोष हो सकते हैं

प्लॉट खरीदने से पहले ही जिस भूमि को हमने देखा है उसका निरीक्षण परीक्षण वास्तु विशेषज्ञ से करवा लेना चाहिए क्योंकि वास्तु विशेषज्ञ भूमि की आकृति मिट्टी का प्रकार आसपास का वातावरण वहां फील होने वाली एनर्जी को महसूस करके वह प्लॉट हमारे लिए शुभ है या नहीं बता देगा

अग्नि कोण में दोष होने पर वहां की स्त्रियां बीमार हो सकती हैं यदि मेडिकल के सभी प्रकार के टेस्ट पॉजिटिव आने  के बावजूद भी यदि किसी घर की स्त्रियां बीमार रहती हैं तो इसका कारण वहां का वास्तुदोष भी हो सकता है

जब मेहनत अनुसार परिणाम नहीं मिलता है हमें लगता है कि हमारा भाग्य साथ नहीं दे रहा है तो ऐसे समय में हमें अपनी कुंडली और मकान का वास्तु दोष दोनों किसी वास्तु विशेषज्ञ को दिखा देने चाहिए

इसकी बजाय आपको अपने नै़ऋत्य कोन की उर्जा को संग्रहित करके उंचा उठाओ तो आपके दुश्मन स्वतः ही निम्न होते जाऐंगे।

यंत्र ताबीज मंत्र यह सभी हमारी रक्षा के लिए ही बने हुए हैं लगभग सभी धर्मों में इनका उल्लेख मिलता है।

ज्योतिष शास्त्र में ऐसा कहा गया है कि चंद्रमा हमारे मन का कारक है सूर्य हमारी आत्मा का कारक है आप जानते होंगे की ज्वार भाटा इन्हीं की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण से आता है जब इतने दूर बैठे हुए चन्द्रमा के कारण  इस पृथ्वी पर ज्वार ले आते हैं तो हमारे शरीर का 71 परसेंट पानी बिना प्रभावित हुए कैसे रह सकता है यह तो एक मात्र उदाहरण है हमारे शास्त्रों में सभी ग्रहों का पूरा उल्लेख किया गया है कि किस ग्रह का मानव पर क्या प्रभाव पड़ता है

आप चाहे वास्तु नियमों को माने या ना माने यह हमें प्रभावित करेंगे ही  जैसे एक बिजली के तार को छू लेंगे तो वह हमें करंट मारेगा ही चाहे हम करंट में विश्वास करें या ना करें

वास्तु का कोई भी यंत्र सामान्यतः हमें नुकसान नहीं करता है लेकिन एक बात ध्यान रहनी चाहिए हम जिस में विश्वास नहीं करते उसको पूरी तरह जाने बिना नकारना नहीं चाहिए और न ही किसी चीज का अपमान करना चाहिए

देशों की भौगोलिक स्थिति अनुसार वास्तु के नियम चेंज हो जाते हैं यहां का वास्तु नियम अमेरिका के लिए या ऑस्ट्रेलिया के लिए या कुवैत के लिए समान नहीं रहेगा

आप किसी भी व्यवसाय में हो वहां यंत्र लगाए जा सकते हैं लेकिन कुछ यंत्र ऐसे होते हैं उनकी शुद्धता का बहुत अधिक ध्यान रखना होता है बीयर बार में कुछ यंत्र लगाए जा सकते हैं लेकिन सभी तरह के यंत्र नहीं लगाए जा सकते उसका ज्ञान वास्तु विशेषज्ञ को होता है

नॉनवेज खाने वालों के घर में लगभग सभी तरह के यंत्र नहीं लगाए जा सकते लेकिन उस घर का निर्माण वास्तु नियम अनुसार किया जा सकता है उस घर में लगाई जाने वाली पेंटिंग दूसरी वस्तुओं का चुनाव वास्तु नियम अनुसार किया जा सकता है

वास्तु और ज्योतिष का गहरा संबंध है वास्तु में निर्माण करते समय शुभ मुहूर्त को देखना होता है जोकि ज्योतिष का अंग है

पिरामिड का निर्माण एक विशेष एंगल पर किया जाता है जो कि 51 डिग्री 5 मिनट है । यंत्र ऐसी वस्तु का होना चाहिए जो कुचालक हो इसमें प्लास्टिक सबसे बेहतर है नया आकाश बनाने के लिए आवश्यक है कि पिरामिड यंत्र कुचालक धातु से बनाया जाए जैसे इजिप्ट के पिरामिड पत्थर के बने हुए हैं लेकिन पत्थर के यंत्र बनाना अभी बहुत मुश्किल सा है प्लास्टिक के यंत्र ज्यादा आसान और प्रैक्टिकल होंगे

नहीं वास्तु किसी धर्म विशेष को प्रभावित नहीं करता है या धर्म विशेष के लोगों को प्रभावित नहीं करता है सभी इंसानों पर समान रूप से प्रभाव डालता है जैसे एक मंदिर होता है उसकी बनावट वास्तु अनुसार होती है एक मस्जिद है या एक गिरजाघर है उनकी बनावट का वास्तु अलग होता है तो वास्तु सभी धर्मों में माना गया है और वह सभी धर्मों को एक जैसा प्रभावित करता है

वास्तु जैविक ऊर्जा बल गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र सौर ऊर्जा पवन के वेग ब्रह्मांड ऊर्जा पंच तत्व का समायोजन है

प्राचीन धर्म ग्रंथों में वेदों में किसी भी तरह के उपायों की चर्चा नहीं लिखी गई है पिरामिड दर्पण यंत्र कलर विचार प्रक्रिया और सामान्य खुशी में सुधार करने में मदद करता है और यह बहुत ही अधिक प्रभावी है

फेंगशुई के नियम चाइना से लिए गए हैं वास्तुशास्त्र के नियम हमारे शास्त्रों में उल्लेखित हैं चाइना के दक्षिण में हिमालय है और भारत के उत्तर में हिमालय है। चाइना में बुद्धा को पूजते हैं और हमारे यहां गणेशजी की पूजा करते हैं।

सभी के बैडरूम की दिशा अलग-अलग होने से 19-20 का प्रभाव अलग रहता है। बाकि एक सा ही फल मिलेगा।

हां वास्तु में प्लॉट का चुनाव करते समय इस बात पर विचार किया जाना पहली महत्वपूर्ण बात है क्योंकि जहां वर्गाकार या आयताकार प्लॉट हमें तरक्की दिलाता है वही त्रिकोण प्लॉट हमें नुकसान भी दे सकता है इसी तरह से अलग अलग आकृति के प्लॉट हम पर अलग.अलग तरह से प्रभाव डालते हैं

जैसी ही प्लाॅट खरीदने का मन बने हमें वास्तु विशेषज्ञ की राय ले लेनी चाहिए। वह हमें बतायेगा कि कौनसा प्लाॅट हमारे लिये शुभ है। यदि हम प्लाॅट पहले ही खरीद चुके हैं तो उसके बाद भी हमें राय ले लेनी चाहिए। यह नहीं सोचना चाहिए कि जब मकान बनाऐंगे तो वास्तु विशेषज्ञ से राय लेंगे। क्योंकि खाली प्लाॅट जो हमने खरीदकर रखा है वह भी हमें प्रभावित करता है।

जब जीवन में ऐसा कुछ हो रहा है जो सामान्यतया से नहीं होना चाहिए। और उसका कोई सही कारण भी समझ में नहीं आ रहा होता है। या हमें लगता है कि इसका कारण वास्तु दोष हो सकता है तो हमें हमारे निवास स्थान या खरीदे हुए प्लाॅट को वास्तु विशेषज्ञ को दिखा देना चाहिए।

वैसे भी हमें हमारे निवास स्थान और खरीदे जाने वाले प्लाॅटके बारे में वास्तु विशेषज्ञ की राय ले ही लेनी चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं है। जीवन हमारा है जिम्मेदारी भी हमारी है।

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Dr. Aneel Kummar Barjatiyaa

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" India's Highest 5* Rating Vaastu Consultant Dr. Aneel Kummar Barjatiyaa (Gold Medalist)is one of the most renowned and Best Vastu Consultants in India. "

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